Sandeep Sharma
Fantasy
साथ वही देता है जो एतबार करता है
दोस्त तो सभी बनने को तैयार रहते हैं।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
मैं उसके संग मिलके सब देखना चाहता हूँ बस एक बार रोना चाहता हूँ। मैं उसके संग मिलके सब देखना चाहता हूँ बस एक बार रोना चाहता हूँ।
एक बार चूम लूं तेरे सर को मैं, एहसास दूं तुझे मेरे होने का। एक बार चूम लूं तेरे सर को मैं, एहसास दूं तुझे मेरे होने का।
तोरे बापू कुछ ना कहते, तेरे आहट को तकते रहते माँ भी तेरी चल ना सकती, पर तुलसी की फेरे तोरे बापू कुछ ना कहते, तेरे आहट को तकते रहते माँ भी तेरी चल ना सकती, पर तुलसी...
नदी के दो पाटों सा जो नदी के साथ साथ चलते हैं पर मिलते कभी नहीं.......! नदी के दो पाटों सा जो नदी के साथ साथ चलते हैं पर मिलते कभी नहीं.........
हमारे बीच में बन गया था आठवां समंदर जिसकी खबर अभी तक जमाने को नहीं थी हमारे बीच में बन गया था आठवां समंदर जिसकी खबर अभी तक जमाने को नहीं थी
अनंत अंतर- आकाश में, काली घटा घिर आई, अनंत अंतर- आकाश में, काली घटा घिर आई,
तन्हा होता हूं तो याद आते हो सांस लेता हूं तो दिल पे छा जाते हो। तन्हा होता हूं तो याद आते हो सांस लेता हूं तो दिल पे छा जाते हो।
शबनम की बूँद प्यार के खुमार में भौंरों के गुंजन गान में गुलशन गुलज़ार में शबनम की बूँद प्यार के खुमार में भौंरों के गुंजन गान में गुलशन गुलज़ार में
अपने प्रेम से बनायें वे दोनों एक नई दुनिया अपने प्रेम से बनायें वे दोनों एक नई दुनिया
कविता सिर्फ नदी की कल कल बहती धार नहीं है कविता उन आशंकित नदी के किनारों की व्यथा है कविता सिर्फ नदी की कल कल बहती धार नहीं है कविता उन आशंकित नदी के किनारो...
बर्फीली चोटियाँ ये हिमालय की मेरे मन को मोहित सदा करतीं बर्फीली चोटियाँ ये हिमालय की मेरे मन को मोहित सदा करतीं
सोच सोच में भी अंतर होता है, कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे होते हैं। सोच सोच में भी अंतर होता है, कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे होते हैं।
तुमसे मिलकर अक्सर नज़रें झुकाते है, हवा से भी नज़रें नहीं मिला पाये, तुमसे मिलकर अक्सर नज़रें झुकाते है, हवा से भी नज़रें नहीं मिला पाये,
थोड़ा सा काम और अधिक कीजिए, सफलता की चाबी तू अपने हाथ लीजिए थोड़ा सा काम और अधिक कीजिए, सफलता की चाबी तू अपने हाथ लीजिए
संगमरमर तराश कर बनाई हुई कोई मूरत जैसी, मन खुश दे रही थी शीतलता भरी दुपहरी।। संगमरमर तराश कर बनाई हुई कोई मूरत जैसी, मन खुश दे रही थी शीतलता भरी दुपहरी।।
जहाँ के कण-कण में प्यार झलकता हो आओ फिर गाँव चले जहाँ शांति सुकून मिले जहाँ के कण-कण में प्यार झलकता हो आओ फिर गाँव चले जहाँ शांति सुकून मिले
वो लोग जिन्होंने देखा ये चेहरा तो कई दफ़ा फिर भी पढ़ा नहीं इस चेहरे को कभी , वो लोग जिन्होंने देखा ये चेहरा तो कई दफ़ा फिर भी पढ़ा नहीं इस चेहरे को कभी ...
छोड़ कागज क़लम और दुनियाँ को देख जाने कब तू भी तारीख बन जायेगा छोड़ कागज क़लम और दुनियाँ को देख जाने कब तू भी तारीख बन जायेगा
यमराज मेरी बात सुनकर अपना सिर खुजाने लगा, यमराज मेरी बात सुनकर अपना सिर खुजाने लगा,
मोहब्बत के नशे में होता जो चूर उसका दिल फिर रहता नहीं उसका मोहब्बत के नशे में होता जो चूर उसका दिल फिर रहता नहीं उसका