साजन का दीदार
साजन का दीदार
विषय - साजन का दीदार
दिनाँक 4/5/2020
विधा कविता
व्याकुल है हृदय साजन का दीदार करने को,
प्रियतम के प्रेम से निज अंक भरने को।
चाहे मुझे असंख्य दुःख मिलें जीवन में,
किंतु पीड़ा के शूल न चुभें प्रिय के मन में,
जाऊँ मंदिर में यही दुआ बार बार करने को,
व्याकुल है हृदय साजन का दीदार करने को।
साजन के लिए किया है मनमोहक श्रृंगार,
यह चूड़ी, बिंदी,कंगना,और मोतियों के हार,
अधीर हैं मन साजन से प्यार करने को,
व्याकुल है हृदय साजन का दीदार करने को।
साजन की याद में मुझे भूख लगे नहीं प्यास,
उनके वियोग में सारी दुनिया लगे उदास,
उनके लिए हँसते-2 मैं तैयार मरने को,
व्याकुल है हृदय साजन का दीदार करने को।
उनका आगमन है जैसे हर्ष का पर्याय,
प्रारम्भ होता है मानो आंनद का अध्याय,
चरणों में पुष्प सी मैं बेक़रार बिखरने को,
व्याकुल है हृदय साजन का दीदार करने को।
