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Jina Sarma

Abstract

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Jina Sarma

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सागर

सागर

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सागर के किनारे बैठने का अनुभव

शब्दों में समेटा नहीं जा सकता,

जिस प्रकार लहरें आती जाती रहती है,

मन में विचारो का सैलाब भी रहता है,

हर लहर मानों एक कविता हो,

जिसे पढ़ने के लिए एक अलग नजरिया चाहिए,

सागर पर्यटको को आकर्षित कर

दूसरों को जीविका दे रहा,

सागर नदियों को भी अपने में समा लेता,

खुलीं आंखे बता नहीं पातीं सागर का अंत कहां है 

सागर आकर्षण और विस्मय दोनों है।


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