रुके नही, झुके नही, निरंतर आगे बढ़े
रुके नही, झुके नही, निरंतर आगे बढ़े
आज आफत की है भरमार
सोचें अब कुछ बातें बुनियादी
अपने मन में सब ऐसी इच्छा लाएं
रुके नहीं, झुके नहीं, निरंतर आगे बढ़े।
ना कर किसी से बहुत अपेक्षा
और ना ही करें किसी की उपेक्षा
सुर दुर्लभ मानव तन पाकर
रुके नहीं, झुके नहीं, निरंतर आगे बढ़े।
जो हमेशा हमारा साथ दे रहा है
उस उगते हुए सूर्य को नित्य नमस्कार करें
परिस्थितियों से जीतना सूर्य से सीखें
रुके नहीं, झुके नहीं, निरंतर आगे बढ़े।
सौभाग्य हमें ना तो हथियारों से मिलता है
और ना ही अधिकारों से मिलता है
ज्ञान का तू दीपक जला लें
रुके नहीं, झुके नहीं, निरंतर आगे बढ़े।
जिंदगी का पल बहुत कम है
दाँव पर सब कुछ लगा हुआ है
गम छुपाते रहें, मुस्कुरातें रहें
रुके नहीं, झुके नहीं, निरंतर आगे बढ़े।
हमारे जिंदगी के सफर में सज्जनों
दुःखों और सुखों की दो नदियाँ बहती है
नेकी करने से ही व्यक्तित्व खिलता है
रुके नहीं, झुके नहीं, निरंतर आगे बढ़े।
