Shishpal Chiniya
Abstract Others
लटक कर लोग
परेशानियों से,
फाँसी को बदनाम
कर रहे हैं ।
मेरे हमसफर
रस्सी
दर्द
शुन्य
ये लम्हे
ईश्क़
बारिश
बस यूं ही
जान
हद है
आज लगता है जैसे वो बिखरे मोती तराशा हुआ... आज लगता है जैसे वो बिखरे मोती तराशा हुआ...
प्यार आदर और भाईचारे के पाठ भी इन बंद मुट्ठियां से शुरू होते हैं इन बंद मुट्ठी में तो साहब ... प्यार आदर और भाईचारे के पाठ भी इन बंद मुट्ठियां से शुरू होते हैं इन बंद ...
हमसे बढ़कर दूसरा कोई ज्ञानी नहीं होता हो ही नहीं सकता ...। हमसे बढ़कर दूसरा कोई ज्ञानी नहीं होता हो ही नहीं सकता ...।
कोई नहीं है बड़ा और न है कोई छोटा सब कोई है एक समान। कोई नहीं है बड़ा और न है कोई छोटा सब कोई है एक समान।
सच की ख़ातिर आज भी, ज़हर पिए सुकरात। सच की ख़ातिर आज भी, ज़हर पिए सुकरात।
ख़्वाबों की बैसाखी से ही यहाँ तक आ पाया हूँ वरना दुनिया ने तो पहले ही अपाहिज कर रखा था। ख़्वाबों की बैसाखी से ही यहाँ तक आ पाया हूँ वरना दुनिया ने तो पहले ही अपाहिज ...
पाठ शाला का साथी मोहल्ले की यारी दो पहर का घूमना कैरी, अमरूद की चोरी कब्बडी, चोर-पुलिस या गि... पाठ शाला का साथी मोहल्ले की यारी दो पहर का घूमना कैरी, अमरूद की चोरी कब्ब...
जब कभी ग़रीबी ने आकर जीना मुश्किल कर डाला हो मज़बूरी और लाचारी ने मिल कर स्वप्नों को पाला हो। जब कभी ग़रीबी ने आकर जीना मुश्किल कर डाला हो मज़बूरी और लाचारी ने मिल कर ...
वो स्वयं की खोज में अटक गया था या यह कहूँ लटक गया था और कब तक क्या जाने कौन जाने। वो स्वयं की खोज में अटक गया था या यह कहूँ लटक गया था और कब तक क्या ...
जलो मत बराबरी की कोशिश करो, क्रिकेट नहीं भारत की सोच को घेरो। जलो मत बराबरी की कोशिश करो, क्रिकेट नहीं भारत की सोच को घेरो।
जब कोई मुश्किल हुई सुनकर मैं पहुंचा दौड़कर सोचे करे बर्बाद मुझको समय रहते तोड़कर था बुझाने का ... जब कोई मुश्किल हुई सुनकर मैं पहुंचा दौड़कर सोचे करे बर्बाद मुझको समय रहते तोड...
सबका मालिक एक सबका मालिक एक
नेह के दाने तलाशती उदास फुदकती। नेह के दाने तलाशती उदास फुदकती।
रिश्तों के आधार की, दरक रही है नींव। समय चक्र के खेल में, भटक गए सब जीव।। रिश्तों के आधार की, दरक रही है नींव। समय चक्र के खेल में, भटक गए सब जीव।।
माटी की सौंधी सुगंध का एहसास कराती हैं। माटी की सौंधी सुगंध का एहसास कराती हैं।
इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी। इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी।
पर यहाँ तुम्हारी ही तरह कई और लोग खड़े हैं पाषाण युग के तेज़ हथियार लिए उनमें और तुममे... पर यहाँ तुम्हारी ही तरह कई और लोग खड़े हैं पाषाण युग के तेज़ हथियार ल...
तमाशबीनी का अधिकार भी, मिलना चाहिए वैसे। तमाशबीनी का अधिकार भी, मिलना चाहिए वैसे।
मूक रहो कुछ ना बोलो, तब भी सब समझ ही जाते हैं हम नही समझते हैं कुछ भी, ये सोच के सब इठलाते हैं मूक रहो कुछ ना बोलो, तब भी सब समझ ही जाते हैं हम नही समझते हैं कुछ भी, ये सोच...
मुझे सपने में ही सही आखिर कहीं तो जीत लेने दे। मुझे सपने में ही सही आखिर कहीं तो जीत लेने दे।