रस आनन्द इस होली में
रस आनन्द इस होली में
आके हुई प्रकट वह रात होली में
मिली फागुन की सौगात होली में
बजी जलतरंग से मिलकर सितारों से
हुआ तरानों का नृत्य अगाध होली में
हर्ष-आनन्द का बढ़ा व्यापार होली में
जिह्वा पर नाम आया बार-बार होली में।
घर-घर रंग सजे उल्लासों की चहल-पहल में
भर-भर के थाल सजे रंग अबीर गुलालों से
नश-नश में उमंग आवेग भरे गीत गोविंदों से
बन-बन दमकती आभा रचते स्वाँगों में
उमड़ा हुजूम गज़ब हर गली किनारों होली में।
गली चौबारों में शोर मचा इस अवसर में
बिखरने लगी रंग की धार गली चौराहों में
भीगे बदन मले गुलाल चेहरों में
खुशियों की गवाही दे रहा घर-आँगन चौराहों में
मेला देखने निकले प्रियतम् होली में।
रंग दी चुनरिया फागुन बहार से
दिल की कामना उभर आई होंठों के द्वार से
नैना लड़ा के पूँछे हर इक शैदाई से
रंग – बिरंगी पोशाकों की पैमाईश से
हसीन चेहरे-मोहरे हर्षोल्लास से भरे होली में।
देख मुखड़े पर मले गुलाल की लाली
दिलों में भर आई हमारे खुशहाली
नजर ने दी हमें रमणी रंग से भरी प्याली
जो हमें दे हँस – हँसकर गाली
तब हम समझे की ऐसी है प्यार भरी होली में।
हमनें तुमने की इक तरफा तैयारी होली की
जिसने जिस तरह देखा इस तरफ होली की
हमारी आन लगती हमको तो प्यारी
लगा दो हाथ से न मारो पिचकारी होली की
रंग – बिरंगी सतरंगी रंगों के सिंगार की होली में।
उड़ाओ तुम उधर से हम भी इधर तैयार खड़े
मलो अबीर गुलाल हँस – हँसकर मुखड़े पर
खुशी आनन्द का इजहार करो होली पर
है कसम तुमको इस होली पर
मिटा दो बैर अपने सारे गिले – शिकवे भी
इसी उम्मीद में था वतन इंतजार होली में।
मूर्तिमान हो दे गाली हमें हँस – हँसकर
रंग पड़ता है कपड़ों पर उड़ता गुलाल तन पर
लगा के घात कोई मुखड़े पर लगाता है
‘परिमल’ प्यार से कोई कहता है
हमें भी दिखा तू रस आनन्द इस होली में।
