Kunda Shamkuwar
Drama
आयी है होली
गुलाल लेकर
मन में ढेर सी
हसरतें लेकर
रंगने को मुझे
चाहत के रंगों में
पिया मेरा
रंगरेज बना है
हवाओं में
मचलकर
लहरा कर
कह रही है चुनरी
पिया के संग
अंग अंग में
मोहे रंगना है
मनभावन रंग में
लाइफ़ इज वैरी...
कहानी में कवि...
कैफ़ियत
नदी की धार सी...
ग्रोइंग अप…
ख़ामोशियाँ
हमसफ़र
एक औरत में कि...
जॉइंट एकाउंट
तुम नही...
बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान। बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान।
शायद मैं उसके योग्य नहीं उसे यह दीपक नहीं, दूसरा सूर्य मिले ! शायद मैं उसके योग्य नहीं उसे यह दीपक नहीं, दूसरा सूर्य मिले !
दे दे इतनी - सी रोशनी कि दिल का अंधेरा दूर कर सकूं मैं कोई टूटी हुई उम्मीद अभी भी जैसे कायम है दे दे इतनी - सी रोशनी कि दिल का अंधेरा दूर कर सकूं मैं कोई टूटी हुई उम्मीद अ...
किसी का विश्वास शीशे जैसा घर जो टूट जाये तो फिर न जुड़े नर किसी का विश्वास शीशे जैसा घर जो टूट जाये तो फिर न जुड़े नर
अरुणाचल में उगते सूर्य का मनमोहक दृश्य है l मेरा भारत सोने की चिड़िया.... अरुणाचल में उगते सूर्य का मनमोहक दृश्य है l मेरा भारत सोने की चिड़िया....
आकर ख़्वाबों में यूँ रोज-रोज तूम.. और इस दिल को बेक़रार न कर आकर ख़्वाबों में यूँ रोज-रोज तूम.. और इस दिल को बेक़रार न कर
कभी मेरे चरित्र पर तो कभी उनके किरदार पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया कभी मेरे चरित्र पर तो कभी उनके किरदार पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया
जो लोग यहां पर खुद्दारी से जिया करते है।। वो आदमी यहां पर कामयाबी से मिलते है। जो लोग यहां पर खुद्दारी से जिया करते है।। वो आदमी यहां पर कामयाबी से मिलते है...
वो मुखौटों में छुपे हुए कुछ 'खुदगर्ज़ी' से भरे चेहरे थे. वो मुखौटों में छुपे हुए कुछ 'खुदगर्ज़ी' से भरे चेहरे थे.
कोख की कोठरी से उसकी चीख बेहोश माँ भी न सुन सकी कोख की कोठरी से उसकी चीख बेहोश माँ भी न सुन सकी
शायद मजाक उड़ाते होंगे मेरी न कही बातों का शायद मजाक उड़ाते होंगे मेरी न कही बातों का
बेसबब गुज़रता रहता है शहरों की तंग गलियों से कभी तो कविता और ग़ज़लों की गली से होकर गुज़र बेसबब गुज़रता रहता है शहरों की तंग गलियों से कभी तो कविता और ग़ज़लों की गली से ह...
सात अरब से भी अधिक जनता, हर मानव की कोई न कोई समस्या वास्तविक या काल्पनिक। सात अरब से भी अधिक जनता, हर मानव की कोई न कोई समस्या वास्तविक या क...
वो दिन भी क्या गजब थे जब हल्की सी चोट लगती थी, तो आँख से आंसू आते थे वो दिन भी क्या गजब थे जब हल्की सी चोट लगती थी, तो आँख से आंसू आते थे
होंठों की जगह आंखों से निकल, न जाने कहां धुआं-धुआं हो जाती है। होंठों की जगह आंखों से निकल, न जाने कहां धुआं-धुआं हो जाती है।
दिल के आँगन ये स्वर्ण सी किरणें बिखर जाती जब हर कोने में दिल के आँगन ये स्वर्ण सी किरणें बिखर जाती जब हर कोने में
आती है, मौत यह, क्रोधाग्नि खूं जलाती, जोत क्रोध है, खोट आती है, मौत यह, क्रोधाग्नि खूं जलाती, जोत क्रोध है, खोट
दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी
दुनिया की भीड़ में खड़ा परिंदा ढूंढता अपनी परछाई को दुनिया की भीड़ में खड़ा परिंदा ढूंढता अपनी परछाई को
कभी जरा सी हवा चली तो बिखर जाता है सपनों का महल l कभी जरा सी हवा चली तो बिखर जाता है सपनों का महल l