STORYMIRROR

writer didi

Abstract

2  

writer didi

Abstract

रंग

रंग

1 min
146

अभी तो रंग मेहँदी का उतरा भी नही था, 

रंग लहू का लगा दिया,

खुद को ऊचा दिखाने के लिये,

फिर एक स्त्री का खून बहा दिया ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract