रंग प्यार के बोने हैं।
रंग प्यार के बोने हैं।
निर्मल बहती नदियों
के पावन जल से,
नफरत के जर्रे जर्रे को
अपने स्नेहाचल से,
अब हमको धोने हैं,
रंग प्यार के बोने हैं।
बंट जाती हैं किरणें
धरा पर चहुँ ओर,
बांटेंगे दुःख सबके
होगा नया भोर,
अब और नही रोने हैं,
रंग प्यार के बोने हैं।
त्याग भाव मे
रमते जोगी सा,
जो साधना में ही
हो लीन सदा,
साथ उनके होने हैं,
रंग प्यार के बोने हैं।
चमक धमक से बचकर
सादगी दरिया बहकर,
जीवन के हार जीत के खेल में,
सुखमय पल संजोकर,
कंचें नफरत के खोने हैं,
रंग प्यार के बोने हैं।
नित ऊंचाई चढ़ना होगा,
हर हाल आगे बढ़ना होगा,
कदम कदम पर कांटें हैं,
हमको और सम्भलना होगा,
जीवन पथ नही सोने हैं।
रंग प्यार के बोने हैं।
