STORYMIRROR

Ashutosh Atharv

Abstract

4  

Ashutosh Atharv

Abstract

रक्तबीज का रूप कोरोना

रक्तबीज का रूप कोरोना

1 min
424

चंद कदम क्या पड़े चाँद पर खुद को खुदा समझ बैठे

क्यूँ धरती की अँगड़ाई को पहले नहीं समझ पाए ?


प्रकृति भूल विज्ञान मूल पर नाहक ही इतराते हो

थोड़ी सी अठखेली पर कातर की तरह कतराते हो


भक्ष्य अभक्ष्य का भेद भुला, परोस दिया है कोरोना

पूरी मानव जाति को आगोश में लिया है कोरोना


रक्तबीज का रूप कोरोना देवभूमि में आया है 

काली की खप्पर और बुद्धि को ललकारा है


अतीत काल में जब भी मानव पर संकट गहराया है 

ईश कृपा, अनुशासन से ही मानव बचता आया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract