रक्तबीज का रूप कोरोना
रक्तबीज का रूप कोरोना
चंद कदम क्या पड़े चाँद पर खुद को खुदा समझ बैठे
क्यूँ धरती की अँगड़ाई को पहले नहीं समझ पाए ?
प्रकृति भूल विज्ञान मूल पर नाहक ही इतराते हो
थोड़ी सी अठखेली पर कातर की तरह कतराते हो
भक्ष्य अभक्ष्य का भेद भुला, परोस दिया है कोरोना
पूरी मानव जाति को आगोश में लिया है कोरोना
रक्तबीज का रूप कोरोना देवभूमि में आया है
काली की खप्पर और बुद्धि को ललकारा है
अतीत काल में जब भी मानव पर संकट गहराया है
ईश कृपा, अनुशासन से ही मानव बचता आया है।
