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Jina Sarma

Inspirational

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Jina Sarma

Inspirational

रक्त संबंध

रक्त संबंध

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रिश्ता रक्त संबंध में ही

सीमित रह नहीं सकता कभी,

स्कूल और कॉलेज में रिश्ता जो बने

शिक्षकों से और दोस्तो से,

उन रिश्तों का एहसास

सजीव रहे सदा,

हां रूठना मनाना भी दोस्तो से

होता था, लेकिन कभी न लगा

रक्त संबंध तो नहीं था;


रक्त संबंध में भी अलग ही खासियत है

मां, पिताजी, दादा-दादी, नाना-नानी,

सबके प्यार का अनूठा अंदाज, एहसास करा दे

परिवार क्यों होता है खास ।


अब धीमें-धीमें हम आत्मकेंद्रिक होने लगे,

आजकल अपने लिए समय निकाल खुद के लिए कुछ करना

संटूष्टि के लिए जरूरी भी हैं; पर कुछ बातों को जीवन भर

एक जैसा रखना चाहिए - 'रिश्ते'


रिश्तों का मोल पैसे और फायदा देख कर अब तो और भी न करें...ढूंढें केवल अपनापन,

रिश्तों का मिठास बरकरार रहे हैं हर पल।


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