STORYMIRROR

Kishore Kumar

Abstract

4  

Kishore Kumar

Abstract

रिश्ते

रिश्ते

1 min
358

कितने रिश्ते बनते हैं 

और कभी बिगड़ जाते हैं 

कभी अपने बिखर जाते हैं 

और अजनबियों से बन जाते हैं 


भाई-भाई, खून का रिश्ता 

उलझ उनमें होता है 

दूर- दूर जिन्हें ना पहचाने 

वो सबसे प्यारा होता है 


कभी जमीन का बंटवारा 

तो कभी मात-पिता का होता है 

सगे-संबंधी अपना होता 

जब अथाह खजाना होता है 


बेटा-बेटी जब त्याग दिया तो

याद करके फिर क्या होता है

जब गांठ पड़ी रिश्तों में 

सुलह कहाँ फिर होता है


अपनों ने तो रिश्ता तोड़ा

साथ अजनबियों का ही रहता है

वो रिश्ते निभा जाते हैं 

जिनसे उम्मीद कहाँ ही रहती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract