STORYMIRROR

रिपुदमन झा "पिनाकी"

Abstract

4  

रिपुदमन झा "पिनाकी"

Abstract

रिमझिम फुहार

रिमझिम फुहार

1 min
273


बारिश की

रिमझिम फुहारों में भीग कर

झूम उठती है धरती

नदियाँ खुशी से कलोल करने लगती हैं

प्रकृति झूमकर लहराती है

तन मन रोमांचित हो उठता है

बाहें फैलाए

आसमान की ओर मुँह किए

आनंद लेती हैं युवतियाँ

बारिश की रिमझिम फुहारों का

बूंदें बनकर मोती

गिरती हैं धरती के आँचल पर

उमस भरी गर्मी से राहत मिलती है

जमा हो जाते हैं

खेतों और मैदानों में

बारिश का पानी

छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चे

भीगते हैं बारिश में

छप - छप की आवाज पर

कूदते हैं जमा हुए पानी में

काग़ज़ की नाव बनाकर

तैराते हैं बहते धारों में

बारिश की बूंदों से

किसानों की उम्मीदें खिल उठती हैं

जनजीवन को संजीवनी मिल जाती है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract