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manoj tandon

Abstract

3  

manoj tandon

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रहमत

रहमत

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अरमानों के पटल पे , 

हर इक इंसान बेचैन क्यों है ,


खुशियां अनगिनत है , झोली में ,

पर कुछ परेशानियों से , हर शख़्स घायल क्यों है,


जो मिला गया , उसे भोग पूरा पाता नहीं ,

फिर नई इच्छाओं का , हर कोई कायल क्यों है 


जिंदगी लाखों परेशान है , इस महामारी में ,

खुदा अगर है तो रहमत बरसाता  क्यों नहीं ,

और अगर नहीं है , तो याद किया जाता क्यों है!


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