रहमत
रहमत
अरमानों के पटल पे ,
हर इक इंसान बेचैन क्यों है ,
खुशियां अनगिनत है , झोली में ,
पर कुछ परेशानियों से , हर शख़्स घायल क्यों है,
जो मिला गया , उसे भोग पूरा पाता नहीं ,
फिर नई इच्छाओं का , हर कोई कायल क्यों है
जिंदगी लाखों परेशान है , इस महामारी में ,
खुदा अगर है तो रहमत बरसाता क्यों नहीं ,
और अगर नहीं है , तो याद किया जाता क्यों है!
