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आनंद कुमार

Inspirational

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आनंद कुमार

Inspirational

रावण

रावण

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मैं रावण,मैं आज रात फिर जल जाउंगा,

बुराई का प्रतीक हूं मैं, मैं आज फिर मर जाउंगा।


लेकिन तुम कब इन बुराईयों को छोड़ोगे?

कब तक अधर्म की राह पर दौड़ोगे?


कलयुग में तुम्हे खुद से ही लड़ना होगा,

अन्दर छिपी बुराइयों का संघार तुम्हें खुद ही करना होगा।


मैं तो मरा था बस एक बार, तुम हर रोज मरते हो,

पाप और पुण्य के चक्रव्यूह से हर रोज घिरते हो।


लड़ना तुमको ही होगा, राम भी तुम और रावण भी तुम हो।

प्यासे भी तुम हो, सागर भी तुम हो।


बदलने दो हवा का रुख, तुम ना बदलना,

धर्म के साथ रहना, अधर्म को तुम ना चुनना।


बनना तुम श्रीराम,रावण तुम कभी ना बनना,

हो कैसा भी अन्याय, उसके खिलाफ तुम लड़ना।


 नहीं बदले तुम तो तुम को भी जलना होगा,

नरक की काल कोठरी मे सड़ना होगा।



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