राष्ट्रप्रेम गीत (10)
राष्ट्रप्रेम गीत (10)
भारत का सैनिक जा रण में,
टकराये चट्टान से।
तुम किस खेत की मूली भाई,
फेंके तुम्हें जहान से।।
मेरा सैनिक निकल गया फिर,
न डरता तूफान से।
मंजिल पाकर दम बो लेता,
पहुंच के जा स्थान से।।
बाधा ना उसे रोक सकेगी,
भेदे अपने बाण से।
मार मार वो लाश बिछा दे,
चूके नहीं निशान से।।
महाकाल का नाम निकलता,
हर पल उसकी जुबान से।
सामने आये दुश्मन जो भी,
जाएं अपनी जान से।।
भारत माँ का वीर सिपाही,
डरता न वह जान से।
मां की खातिर लड़े काल से,
चाहे जाये जान से।।
