STORYMIRROR

Rajiv Jiya Kumar

Abstract

4  

Rajiv Jiya Kumar

Abstract

रागिनी राग की

रागिनी राग की

1 min
350

वह फाग फाग फाल्गुनी 

वह झन झन झंकार सी

वह रात सजाती चाँदनी

वह राग राग की रागिनी।।

वह तान तान तरंगिणी 

वह सन सन पुरवाई सी

वह सपने जगाती कामिनी

वह राग राग की रागिनी।।

वह जगमग जगमग जुुगनी 

वह थपकी देती लोरी सी

वह घन घन करती दामिनी

वह राग राग की रागिनी।।

वह कल कल नदियाँ

वह मदमाती अंगड़ाई सी

वह फुुसफुसाती खामोशी

वह राग राग की रागिनी।।

वह अंंग अंग फुलवारी 

वह मस्त मस्त तन्हाई सी

वह रंंग रंग रंगती जामिनी

वह राग राग की रागिनी।।

वह खन खन किलकारी 

वह जज्बात संवारती बात सी

वह मिठास घोलती चाशनी 

वह राग राग की रागिनी।।

         


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract