प्यार का दीया
प्यार का दीया
रात भर प्यार का दीया हम जलाते रहे
जितने भी गाये गीत उनको गुनगुनाते रहे
वो मदहोश होके आगोश में लिपटे थे मेरे
उनके बदन को रात भर जवानी से भिगोते रहे
रात भर..............................
करवटें बदल - बदल के उनके जिस्म का टूटना
वो उनका पतले आंचल से यौवन का ढांकना
न होश रहा हमको न होश रहा उनको
वो रात भर चुंबनों से किस्सा - ए - काम सुनाते रहे
रात भर..............................
कहीं रात बीत न जाए प्यार रह न जाये
है खबर प्यार की कुछ उनको और हमको
पर डरता है दिल कहीं कोई भूल हो न जाये
भूल अगर होती है तो आज भले हो जाये
ये प्यार का सिलसिला अधूरा न रह जाये
हम आलिंगनों से सिलसिला यूं बढ़ाते रहे
रात भर.............................
जब सुबह हो गई रात भी बीत गई
बिस्तरों की सलवटें देख के यादें फिर बढ़ने लगी
काश वो वक्त वहीं थम जाये
मेरे रात का प्यार यौवन की तरह पनपता रहे
रात भर..............................

