पवित्रता का बल
पवित्रता का बल
शुद्ध हो विचार और निष्कपट व्यवहार हो
पवित्रता ही तेरे जीवन का मूल संस्कार हो
पुरुष जन्म पाकर पौरुष तेरा बलवान हो
अशुद्धि का मन में तेरे नाम ना निशान हो
मन, वचन और कर्म शुद्ध कर शुद्ध कर
हार मत विकारों से तूँ युद्ध कर युद्ध कर
ब्रह्मचर्य की रक्षा से ओज को बढ़ाता चल
दाग जो बचे खुचे उनको भी मिटाता चल
इक यही है धन तेरा जो काम तेरे आएगा
पवित्रता के बल से तूँ स्वर्ग सुनहरा पाएगा।
