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Dr Jogender Singh(jogi)

Abstract

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Dr Jogender Singh(jogi)

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पुताई बेमानी सी

पुताई बेमानी सी

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रक्ताभ आदित्य की उष्णता कम होती जाती , 

रंगे पुते चेहरों के जोश सी ।

काले बाल फेशीयल से खिंचे गाल ।

गुर्दे दिल का हाल नहीं बताते । 

लिफ़्ट ख़राब होने पर ,मंज़िल दो मंज़िल चड़ने में हाँफना ।

मेरी पोल खोल देता ।

काले बाल खिंचे गाल सीड़ी चड़ने में मदद नहीं करते 

ज़रा सी भी नहीं ।

 फिर भी बाहर बाहर सजने का यत्न रोज़ करता हूँ ।

बाहर निकला पेट और चेहरे पर किया पेंट ,

एकदम अलग अलग कहानी बताते ।

रंगे सियार सा , घंटो शीशे के सामने आत्ममुग्ध खड़ा रहता हूँ, 

जवानी के झूठे अहसास को जीते हुए।

खंडहर इमारत की बग़ैर मरम्मत की पुताई जैसा ,

एक चमकीला सा , हांफता बदन रोज़ ढो रहा हूँ ।



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