पुरुषों का दर्द
पुरुषों का दर्द
चाह कर भी कुछ नहीं कह पता,
एक रोटी से ही भूख मिटा लेता ।
धोखा मिलने पर भी मुस्कुरा देता,
रिश्ते निभाते निभाते खुद को भूल जाता ।
हर दर्द को दिल में छुपा रहता,
दो–चार गालियां सुनकर भी चुप रहता ।
खुद को हर वक्त इतना व्यस्त दिखाता,
जैसे उसको दर्द ही नहीं हो रहा होता ।
