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Kahaniyon Ki Duniyaa

Classics

4.6  

Kahaniyon Ki Duniyaa

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पुरुषों का दर्द

पुरुषों का दर्द

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चाह कर भी कुछ नहीं कह पता,
एक रोटी से ही भूख मिटा लेता । 

धोखा मिलने पर भी मुस्कुरा देता,
रिश्ते निभाते निभाते खुद को भूल जाता ।

हर दर्द को दिल में छुपा रहता,
दो–चार गालियां सुनकर भी चुप रहता । 

 खुद को हर वक्त इतना व्यस्त दिखाता,
जैसे उसको दर्द ही नहीं हो रहा होता । 


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