(( खुद के लिए जागो ))
(( खुद के लिए जागो ))
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आखिर कब तक मोम की बत्तियों से
इंसाफ की भीख माँगते रहोगे।
इन समाज, कानून और प्रशासन के
भरोसे, और कब तक चुप रहोगे?
तुम इस देश की बेटी,
इस देश की रोशनी हो।
डर को आँखों के सामने से हटाओ,
तुम खुद के लिए अकेले ही काफी हो।
कोई गलत करने की करे कोशिश,
तो जाना दुर्गा बन।
अपनों के सामने भी नहीं झुकना,
अगर बात आए आत्मसम्मान पर।
लेखक — न्यूसन साहू
