जलाकर सपनों को यूँ ही क्या अस्तित्व उसका अब मिटा दोगे ? जलाकर सपनों को यूँ ही क्या अस्तित्व उसका अब मिटा दोगे ?
भ्रम जाल को तोड़ो नारी, भ्रम जाल तोड़ो। उठो, सजग बनो, अपना भविष्य स्वयं संवारो। भ्रम जाल को तोड़ो नारी, भ्रम जाल तोड़ो। उठो, सजग बनो, अपना भविष्य स्वयं...
बंद हो ये खिलवाड़ सारा नारी कैद से आज़ाद हो। बंद हो ये खिलवाड़ सारा नारी कैद से आज़ाद हो।
नारी अनेक भूमिकाऐंं निभाती है, कभी माँ, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी बेटी । इस शक्ति स्वरूपा की सबसे विशि... नारी अनेक भूमिकाऐंं निभाती है, कभी माँ, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी बेटी । इस शक्ति ...
बदलती दुनिया के परिदृश्य में बदलती हुई स्त्री की भूमिका को अबिव्यक्त करती यह रचना दुनिया बदलेगी ! बदलती दुनिया के परिदृश्य में बदलती हुई स्त्री की भूमिका को अबिव्यक्त करती यह रचन...
मैं आधुनिक युग की नारी हूँ ! मैं आधुनिक युग की नारी हूँ !