STORYMIRROR

Rajkumar Jain rajan

Abstract

3  

Rajkumar Jain rajan

Abstract

पुनर्जन्म

पुनर्जन्म

1 min
437

पेड़ की पीली हो गई 

पत्तियों ने

मेरी ओर मुस्करा कर देखा

और पूछा -

मौसम बदल रहा है

यह पेड़ भी गिरा ही देगा हमें

नव किसलयों के स्वागत में


क्या तुम भी

टूट कर

बिखरना जानते हो ?

यही है प्रकृति का शाश्वत नियम

प्राचीन की विदाई ही

 नवीन का स्वागत है

जीवन के सृजन में


खुद से खुद की लड़ाई

लड़ते-लड़ते टूटने पर ही

नव सृजन होता 

यह सृष्टि का


अंतिम बिंदु होता है

जहाँ मिट जाने का भाव

मन को विश्वास में लेता है

इसलिए टूट कर 

मिट जाने का दर्द 

हमें नहीं होता है

हमारे समर्पण से ही तो

नव-पल्लव खिलता है


हमारा यही विश्वास

प्रेम की नम सतह पर

भविष्य को

एक नई दिशा देता है और

अपनी पीड़ा का 

उत्सव मनाता है


ऐसे ही तो होता है

मानवता का पुनर्जन्म !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract