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Dheeraj kumar shukla darsh

Tragedy

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Dheeraj kumar shukla darsh

Tragedy

पत्थर दिल

पत्थर दिल

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पत्थर का दिल हो गया

आज के इंसानों का

ठहरा हुआ जो आज

मतलब की कीलों पर

और मानव में मिट गया

इंसानियत का भाव यहाँ

इस्तेमाल करना सीख लिया

इंसान ने इंसान का

देखोगे चारों और जब

मतलबी सब दिख जायेंगे

जरूरत के समय यहाँ

रिश्ते निभाये जायेंगे

पैसों के पीछे भागती 

दुनिया का सच है यही

पत्थर हो गया मानव

और दिल उसका भी



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