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Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

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Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

पथिक

पथिक

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ये दुनिया मुसाफिरखाना है,

पथिकों का आना जाना है।

कुछ दिनों का यहाँ ठिकाना है,

ऐ पथिक! इक दिन तो यहाँ से जाना है।


किस बात का तुझे इतना अभिमान है? 

माटी का तू तो इक पुतला है।

तेरे रंग रूप और काया को ,

ऐ पथिक! माटी में इक दिन मिल जाना है।


कुछ साथ तुझे नहीं ले जाना है ,

खाली हाथ तुझे इस जग से जाना है।

सब कुछ तुझे यहीं छोड़ जाना है।

ऐ पथिक! एक कफन में ही तुझे यहाँ से जाना है।


कितनों से मुँह तूने मोड़ा है,

अपनों का दिल तूने तोड़ा है।

इस बात को तू बिल्कुल भूल गया,

ऐ पथिक! इन्हीं के कंधे पे इस जग से तुझे जाना है।


झूठी दौलत तूने कमाई है,

झूठी शोहरत तूने यहाँ पाई है।

तूने की जो पाप की कमाई है,

ऐ पथिक! उसे यहीं रह जाना है।


जो जग में तेरे अपने हैं,

जिनसे सजाए तूने सपने है।

किसी को साथ न तेरे संग चलना है,

ऐ पथिक!अकेले ही तुझे यहाँ से जाना है।


है ईश्वर का नाम ही इक सच्चा,

जिसको ही तूने भूलाया है।

इस जीवन के फंदों से,

ऐ पथिक। उसे ही तुझे बचाना है।


छोड़ मोह माया और धन दौलत,

कर ईश्वर के नाम का तू स्मरण।

इस भवसागर रूपी दुनिया से,

ऐ पथिक! उसको ही तुझे पार लगाना है।


जप ले अभी भी वक़्त गया नहीं,

सुधर जा वक़्त अभी भी हाथों में है।

वर्ना अंत समय तेरा जब आएगा,

ऐ पथिक! तुझे खूब ही पछताना है।



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