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शशि कांत श्रीवास्तव

Abstract

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शशि कांत श्रीवास्तव

Abstract

"पथिक "

"पथिक "

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ऐ,पथिक तू युवा और नौजवान है

चला चल -अनवरत 

अपनी राह तू

मत भटक मंजिल से अपनी 

क्योंकि

 तू -भरा हुआ है जोश और ऊर्जा से

तुझमें है ,अदम्य साहस      

बाधाओं से पार पाने की  

कुछ कर गुजरने की

चुनो तुम राह सदा वही जीवन में 

जिस राह पर कोई गया न हो कभी 

क्योंकि तुम एक युवा पथिक हो 

विचलित कभी भी मत होना 

उस राह पर ,बाधायें आयेंगी अनेक 

मिलेंगे राही भी 

कुछ चलेंगे --कुछ छूटेंगे 

कुछ तोड़ेंगे --कुछ जोड़ेंगे 

तुम्हारे मनोबल को 

पर तुम कभी न टूटना 

क्योंकि ,मंजिल पास तुम्हारे है 

क्योंकि,तुम हो युवा पथिक 

इस पथरीले पथ के ....पार

सुनहरा कल कर रहा है -इंतजार



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