अजय गुप्ता
Inspirational
पथिक हूं इस धरा पर,
एक सार्थक यात्रा करनी है।
न थकना है न रुकना है,
हर हाल में आगे बढ़ना है।
सत्य प्रकृति दृढ़ निश्चय से,
प्रभु से क्षितिज पर जा मिलना है।
अमृत
यादों की दुनि...
गर्भ शिशु
रहबर
आसमान
दोस्त
पीपल पर्णिका
कैनवास
रिश्ते
लॉक डाउन का व...
अब न जाने देंगे तुमको राह निहारु पल पल अब तो। अब न जाने देंगे तुमको राह निहारु पल पल अब तो।
जिसका अपना एक हिस्सा है अपना एक अस्तित्व, जिसका अपना एक हिस्सा है अपना एक अस्तित्व,
जन्मदिवस मां शारदे का, बसंत पंचमी को आए। जन्मदिवस मां शारदे का, बसंत पंचमी को आए।
बाहर के पाखंड को बिसराओ, एक बार अंतस की यात्रा कर आओ। बाहर के पाखंड को बिसराओ, एक बार अंतस की यात्रा कर आओ।
मेरे शंकर मेरे नटराज़ : तेरी महिमा का क्या करूँ बखान! मेरे शंकर मेरे नटराज़ : तेरी महिमा का क्या करूँ बखान!
कई बार सुनती हूँ यह जुमला, आखिर तुम करती ही क्या हो! कई बार सुनती हूँ यह जुमला, आखिर तुम करती ही क्या हो!
हर कोई झुंझ रहा हैं सरगम को तोड़ रहे अड़ियल स्वरों से। हर कोई झुंझ रहा हैं सरगम को तोड़ रहे अड़ियल स्वरों से।
मन में सब भाषाओं का जुड़ाव पाया हो हिंदी को राष्ट्रीय भाषा में स्तर में स्वाभिमान हो। मन में सब भाषाओं का जुड़ाव पाया हो हिंदी को राष्ट्रीय भाषा में स्तर में स्वाभ...
जन जन की भाषा में इसे गाकर अपने को धन्य मानते हैं स्वान्तः सुखाय कहकर। जन जन की भाषा में इसे गाकर अपने को धन्य मानते हैं स्वान्तः सुखाय कहकर।
बनता बिखरता हर पल, उनका उनसे हूबहू हो नहीं सकता ! बनता बिखरता हर पल, उनका उनसे हूबहू हो नहीं सकता !
तेरे ही आँचल में खिलकर पल कल तेरी ही शान बढ़ायेंगे तेरे ही आँचल में खिलकर पल कल तेरी ही शान बढ़ायेंगे
शिक्षा दीक्षा स्वच्छता से निखारो गाँव को ऐसे मुड़ मुड़ के गाँव को देखेगा भी शहर।। शिक्षा दीक्षा स्वच्छता से निखारो गाँव को ऐसे मुड़ मुड़ के गाँव को देखेगा भी शहर...
अमर रहे यह देश हमारा, आओ करें हम चहुँमुखी विकास। अमर रहे यह देश हमारा, आओ करें हम चहुँमुखी विकास।
खेल-कूद खूब करो, मगर पढ़ाई से भागने के ना करो बहाने तुम। खेल-कूद खूब करो, मगर पढ़ाई से भागने के ना करो बहाने तुम।
और कह कर फिर से फर्क मापने वालों के हिल जाने से फर्क तो पड़ता है... और कह कर फिर से फर्क मापने वालों के हिल जाने से फर्क तो पड़ता है...
पूजन अर्चन करें खड़े, 'माँ' स्कंध के द्वार पूजन अर्चन करें खड़े, 'माँ' स्कंध के द्वार
संतुष्टि का भाव रहे, खुशी पाते सब जन॥२॥ संतुष्टि का भाव रहे, खुशी पाते सब जन॥२॥
आज गणतंत्र दिवस आया मिलकर सब खुशी मानते हैं। आज गणतंत्र दिवस आया मिलकर सब खुशी मानते हैं।
कहते कहते कह जायेंगे उठाओ जंग-ए-आजादी का झंडा उठाओ…… कहते कहते कह जायेंगे उठाओ जंग-ए-आजादी का झंडा उठाओ……
तेरे साथ एक क्या, हजारों समुंदर पार करना चाहता हूं।। तेरे साथ एक क्या, हजारों समुंदर पार करना चाहता हूं।।