STORYMIRROR

अजय गुप्ता

Others

3  

अजय गुप्ता

Others

दोस्त

दोस्त

1 min
568

पुरानी यादों में

कुछ वाकये हैं

उनके किरदारों में

चंद पुराने यार हैं


वक्त बेवक्त मैं

जब उलझता हूं

उन यादों को

उंगलियों से कुरेदता हूं


कहीं महक आती है

पारिजात के फूलों सी

कहीं गीत संगीत

मद्धिम सा बजता है


छू जाती हैं सर्द हवाएं

जेठ के महीने में 

कभी भीग जाता हूं

पतझड़ के मौसम में


खिलखिला के हंसते हैं

दोस्त वो पुराने

किस्से कहानियों का 

पुराना दौर चलता है


अनगढ़े वक्त की मासूम बातें

इस दौर में बिछड़ सी गई हैं

खुद को साबित करने में गुल्लक

लोहे की तिजोरी में खो सी गई है ।।


Rate this content
Log in