Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

अजय गुप्ता

Abstract

4.8  

अजय गुप्ता

Abstract

लॉक डाउन का वक्त

लॉक डाउन का वक्त

1 min
334


घर पर रुके रुके

एक अरसा गुजर गया था

मुठ्ठी की रेत सा फिसलता 

समय अब रुक सा गया था


ना जाने कितने प्रयोग कर लिये

अब शायद कुछ बचा ही ना था

नजर दौड़ाई तो सोचा

अलमारी ही ठीक कर ली जाए


हैंगर पर कपड़े तरतीब से टंगे थे 

अधिकांश धुले और इस्त्री किए थे

एक सेक्शन कुछ अनछुआ सा था

कपड़ो का अंबार सा लगा था


सब आपस में गुत्थमगुत्था

अरे ये कमीज भी तो है मेरे पास

 कब से देखी ही नहीं पहनी ही नहीं

उसके पीछे की तरफ लाल रंग लगा था


ऐसे जैसे किसी ने ठप्पा लगाया हो

प्रेम से अपना निशान बनाया हो

फिर वो शाम याद आ गई 

नदी किनारे की मुलाकात याद आ गई

 

धुले कपड़ों में सब धुल गया था

पर इस सेक्शन अभी कुछ बचा था

काफी पुरानी एक डायरी भी रखी थी 

उस ज़माने की कविताएं लिखी थी


बहुत करीने से हर पन्ना सजा था

उस वक्त का इतिहास लिखा था

एक पन्ने पर आड़ा तिरछा 

अजीब सा कुछ लिखा था 


काफी वक्त उस पन्ने पर लगा था

सोचता रहा उसमे क्या छुपा है

 सबसे ज्यादा समय वहीं कटा था

कुछ शब्दों की उकेरी हुई लकीरों में


पुराना वक्त रह रहा होता है

कुछ सुलझे कुछ अनसुलझे 

सवालों में वो सो रहा होता है 

वक्त कभी कटता नहीं


परत दर परत यादों में

दर्ज हो रहा होता है

जैसे ही पलटों पन्ने

टांग पसारे सो रहा होता है


जगाओ उसे तो होता है

इतना कुछ उसके पास

मानो दरिया यादों का 

बह रहा होता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract