STORYMIRROR

Ranjeeta Dhyani

Inspirational

4  

Ranjeeta Dhyani

Inspirational

प्रतिशोध

प्रतिशोध

1 min
381

प्रतिशोध के भाव में

कभी न सुख पाओगे


पल-पल हर पल तुम

अपना खून जलाओगे


रह जाओगे रात-दिन

योजना बनाते-बनाते


बिछड़ जाओगे खुद से

अपने नाश के बीज बोते


कई जन्मों के बाद तुमने

ये मनुष्य जन्म पाया है


ईर्ष्या-द्वेष की आग में

छिपी पतन की छाया है


प्रतिशोध की ज्वाला तुम्हारे

जीवन का संहार करेगी


हे! मानव प्रभु भक्ति से ही

नैया तुम्हारी उस पार लगेगी।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational