प्रतिमूर्ति
प्रतिमूर्ति
सदा अष्ट शक्तियों की प्रतिमूर्ति
विशेषता भारतीय नारी की।
माँ बेटी बहन बहू रुप नारी
विस्तार को सार में लाती।
स्वयं जागकर सबको जगाती
तपकर जग में द्युति फैलाती।
दो कुल को संवारती है नारी
स्व शक्ति से कुल सम्हालती।
स्नेह प्यार जी भर के लुटाती
सुख चैन के लिए श्रम करती।
सृष्टि का बीज रूप है नारी
आदि शक्ति रूप कहलाती।
घर में घर के देहरी पार भी
ज्योति रूप सम जगमगाती।
कठिन प्रसंगों में आगे होती
वक्त की पहचान है नारी।
उलझे सूत को सहज छुड़ाती
सर्व दिलों पर राज करती।
जब मूल शक्ति को भूलती
विडम्बना का पात्र हो जाती।
जीवन नैय्या की पतवार होती
गृहस्थी को गृहस्थाश्रम बनाती।
अष्ट शक्तियों की प्रतिमूर्ति नारी
विशेषता है भारतीय नारी की।
