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Bhawna Kukreti Pandey

Abstract

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Bhawna Kukreti Pandey

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प्रश्नोत्तर

प्रश्नोत्तर

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जीवन अमूमन

गणित जैसा नही होता

की एक प्रश्न का उत्तर एक ही हो।

एक जमा एक दो ही हो,

वो ग्यारह हो कर सही उत्तर को

अवाक कर देता है।


अक्सर उत्तर प्रश्न में जीवन की

सरलता का आदि होता है

लेकिन ये दार्शनिकता उसे मौन कर देती है

सच भी तो है कि

सबके लिए प्रश्नों के अर्थ

उनकी मनःस्थिति,

परिस्तिथि, परिवेश तय करता है

और उत्तर मुँह लटकाए खड़ा रहता है

प्रश्नों की चाबुक को झेल कर।


कभी एक ही प्रश्न

विदूषक हो कई रूप में

जीवन की स्वरलहरियों पर हंसता है।

और जब ताक में बैठा उत्तर ,प्रश्न खड़ा करता हो

तो और भयावह हो जाता है

जीवन की, प्रश्न की सहजता के लिए।

प्रश्न उत्तर के युद्ध मे

किसी को नही भान रहता

वे कहा कैसे उपजे हैं ।


उत्तर ,प्रश्न के किस रूप से लिपटे है

ये अज्ञान सब बदल देता है

अर्थ का अनर्थ इसी से उपजता है।


मगर जब भी

ये प्रश्न उत्तर अमूर्त होते हैं

गणित की तरह,इन्हें भाषा की

दरकार होती है अभिव्यक्ति के लिए।

मगर अभिव्यक्ति फिर प्रश्न उत्तर

के व्यूह में फंस जाती है।


और क्योंकि

कल ही पढा मैंने

हर मानव के जीवन मे

गणित से पहले भी गणित रहता है,

चुप हूँ अपने उत्तरों को ले कर।


ये जीवन का अलग ही रण

उलझा देगा प्रश्नों के उत्तरों को

और सही प्रश्न के सही उत्तर

एक दूसरे के लिए भटकते रहेंगे

मूर्त रूप में अपना साझा अर्थ खो कर।


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