प्रकृति
प्रकृति
जब तक मैं
सागर की छलकती पानी हूँ
आनंद के साथ खेल सकते हो .
जब तक मैं
फाल्गुन की मंद वायु हूँ
सिहरन महसूस कर सकते हो
युवा देह में .
जब तक मैं
सावन की काली बदरिया हूँ
भीग सकते हो आनंद के साथ .
जब तक मैं
स्थिर, स्वच्छ और पवित्र हूँ
आनंद के साथ खेल सकते हो
हर दिन .
मेरी स्थिरता को देखकर
शक्ति की परीक्षा न लो
अंधी - तूफान को आमंत्रण न दो .
शांत ज्वालामुखी को देखकर
अग्नि की परीक्षा न लो
जलकर खाक हो जाओगे .
प्रकृति हूँ मैं
मुझसे लड़ो मत
जानती हूँ तुम्हारी शक्ति
जल जायेगी दुनिया
मेरे गुस्से की आग से
मुझसे लड़ो मत।
