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Sumit. Malhotra

Abstract Action Inspirational

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Inspirational

प्रकृति को मनाना होगा।

प्रकृति को मनाना होगा।

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प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए हम सबको,

अब कुछ ठोस कदम उठाकर धरती को बचाना होगा।

कब और कहां-कहां हम सभी धराशायी हो जाएं,

अब तो हम सबको एकजुट हो संभलना ही पड़ेगा।


माना कि पास अभी रास्ते और भी बहुत-से है,

ये दौर आखिरी नहीं शायद दौर अभी और है।

हम सबके जीवन में कोई उम्मीद की किरण नहीं है,

प्रकृति की चेतावनियों की पर हमें कोई फ़िक्र नहीं है।

खत्म करके हम पर गिराकर एक दिन बिजलियां,

प्रकृति बार-बार हमें समझाती ही तो आ रही है।


हम चाहे मिट जाये क्यों ना मिट्टी के ही भाव,

अब हर तरह के प्रदूषण का खात्मा करना है।

क्या मिलेगा हमें प्रकृति से दिल्लगी करके,

यूं ना खेलिए प्रकृति से सब तबाह हो जाये।


वक़्त और प्रकृति का हर पहर एक जैसा नहीं होता,

हर प्रकार की मुसीबतों का हल सिर्फ पैसा नहीं होता।

अभी भी घर की बात वाली स्थिति है तो संभल ही जाइए,

वर्ना कितना विनाश और प्रलय प्रकृति द्वारा होगा सोच

नहीं सकते।


बार-बार मौके देकर प्रकृति भी एक दिन थक जायेगी,

सब कुछ तबाह और नाश करके ही फिर चैन पायेगी।

लगे सूख गई है संवेदना और मर चुकी मनों की टीस,

कोई किसी के लिए रोता नहीं एक मरे या दस या बीस।

समाप्त।



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