STORYMIRROR

अच्युतं केशवं

Abstract

3  

अच्युतं केशवं

Abstract

प्रकृति का शिशु

प्रकृति का शिशु

1 min
340

प्रकृति का शिशु

मानव

भूल

नेह ममता वात्सल्य

प्रकृति का स्वामी बनने के

प्रयास में जुटा

भूल

अपनी सामर्थ्य की सीमा

और

प्रकृति माता की

क्षमा की मर्यादा को

देता

सर्वनाश को आमंत्रण

कब तक सहेगी

प्रकृति यह अनर्थ

और

जब टूटेगा उसका धैर्य

तो

कहां शरण पायेगा

ये मानव


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract