प्रकृति का नियम
प्रकृति का नियम
मैंने पूछा कुदरत से,
ठण्ड क्यों इतनी लगती है,
क्यों घना है कोहरा,
कंपकंपाती सर्द हवाएँ,
शरीर में क्यों चुभती है ?
कुदरत ने कुछ ना कहा,
वक़्त थम-सा गया,
फिर उसने मुस्कराकर,
ये प्रकृति का नियम बताया !
मैंने पूछा कुदरत से,
तुम इतनी निष्ठुर क्यों हो,
गरीबों से इतनी खफ़ा क्यों हो,
जिनके पास नहीं है गर्म कपड़े,
कुछ उनके लिए नहीं सोचती क्यों हो ?
कुदरत ने कुछ ना कहा,
वक़्त थम-सा गया,
फिर उसने मुस्कराकर,
मेहनत का महत्व बताया !
मैंने पूछा कुदरत से,
क्यों बनायी अमीर-ग़रीब की खाई,
क्यों चलती भलाई के पीछे बुराई,
क्यों होती है बाप के लिए बेटी पराई ?
कुदरत ने कुछ ना कहा,
वक़्त थम-सा गया,
फिर उसने मुस्कराकर,
ये जग का नियम बताया !
