परिवार
परिवार
अपनों का छोटा सा संसार
रक्त संबंध जिसका आधार
कहलाता है परिवार।
स्नेह का खुलता जहां द्वार
मिलता है अपनत्व अपार
कहलाता है परिवार।
एक-दूजे की बाहें थाम
निभाते सब जीवन भर साथ
कहलाता है परिवार।
सही-गलत का मिलता ज्ञान
भले-बुरे की होती पहचान
कहलाता है परिवार।
सुख-दु:ख में आते सब काम
करते कर्म सब फर्ज जान
कहलाता है परिवार।
ऊंचा करते कुल का नाम
मिलजुल करते सब काम
कहलाता है परिवार।
धैर्य-प्रेम-विश्वास-सहयोग
परिवार का स्तंभ आधार
इसके बिना बनता न परिवार।
