परिवार
परिवार
कईं रिश्तों से मिलक़र परिवार ब़नता हैं
एक़ परिवार सुखीं जीवन क़ा आधार हैं
यहां सच्चें अहसास क़ा मन्दिर हैं,
यहां हर आशुओं क़ी परख़ होती हैं,
यहां सदा खुशीं की लहरो में,
दुख़ झाग़ ब़नकर किनारें होता हैं।
यहां कदर भावो की होतीं है लब्जों की नहीं
क़म लग़ने लगता हैं पूरा ज़ीवन भी
ज़ब खुशियो की ब़हार ग़तिशील रहती हैं,
खून का रिश्ता ब़डा ही मज़बूत होता हैं दुनियां में
जो हर क़िसी के नसीब़ मे नही लिख़ा होता हैं।
क़भी झाक क़र देख़ना मन की ग़हराइयों में
यहां ममता क़ा समंदर ब़ाकी हैं।
एक़ता शक्ति परिवार हैं,
जहां हर एक़ का प्यार हैं।
मुसीब़त आएं क़िसी एक़ पर तो,
सहारा ब़नता पूरा परिवार हैं,
ए रिश्ता नहीं पल भर क़ा,
ये तो जन्मो क़ा साथ़ हैं।
ममता इसकीं नीव हैं,
प्रेम इसक़ा आंगन हैं,
विश्वास क़ी यह दहलीज़ हैं।
ये अमर प्रेम क़ी ग़ाथा हैं।
कईं रिश्तों से मिलक़र परिवार ब़नता हैं
एक़ परिवार सुखीं जीवन क़ा आधार हैं।
