STORYMIRROR

ananya rai

Romance

3  

ananya rai

Romance

प्रेम

प्रेम

1 min
240

प्रेम की चाशनी में डूबे हुए, 

प्रेम की चांदनी में नहाए हुए, 

प्रेम में बावली हो गयी मैं सनम

बस तुम्हारी चरणधूलि पाकर।।

 

कुछ भी देखा नहीं, देखकर भी, 

कुछ भी जाना नहीं, जानकर भी, 

बस तुम्हारी हुई ,बस तुम्हारी हुई, 

रंग चोखा चढ़ा प्रेम तुम्हारा पाकर।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance