STORYMIRROR

Sachhidanand Maurya

Abstract

4  

Sachhidanand Maurya

Abstract

प्रेम-द लव

प्रेम-द लव

1 min
413


   (१)

तू साँचा बिन

तुम्हें मैं कैसे ढालू,

तू ख्वाब सा

तुम्हें मैं कैसे निकालूँ

तू झलक एहसासों का

तुम्हें नैनों में पा लूँ

दिन रात तड़प अकेले

तुमसे चैन खुदा मैं माँगू।


     (२)


हाँ तू नही है बस में

और है सब रस में

दिखता तू ममता में भी

और दिख जाता तरस में

तुम्हे नैनों में छुपाकर

दूर न जाने कि

हर दुआ मैं माँगू।




      (३)


तू पिता- पुत्र में

तू भगिनी-भातृ में

तू पति-पत्नी में

तू धी-मातृ में

तू दीवानी -दीवाने में

तू माँ -बच्चे में

तू हर रिश्ते- नातों में

करना ये एहसान तुझे

हर जर्रा मैं बांटू।




    (४)

तू इंतजार तू बेबसी

तू अल्फाज तू कहकसी

तू आंसू तू हंसी

तू जान तू जिंदगी

ठहरे न तू और कहीं

मेरी बस है यही आरजू

तुझमें खुद को मैं समा लूँ।




       (५)


तू बेरोक टोक

तू बंदिशों में बसता

तू विहंग सा भर्मण करे

तू राधे -कृष्ण में रसता

तू शब्द अनमोल अनोखा

होठों की सदा मैं माँगू।




     (६)



तू बिछड़न की अश्रुधार

तू जीवन का सार सार

क्यों तुझे करे जमाना तार तार

इधर मैं उधर वो महसूस करे

तू दिख जाता है आर -पार

मैं ही जानू कैसे

ये निशा मैं काटूँ।




      ( ७)


तू मुस्कान में दिखता 

तू अरमान में दिखता

तू पहचान में दिखता

बेशक तू है एक मगर

तू दो जान में दिखता

सागर का मोती तू

गर डूबा मैं पा लूँ।







विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract