प्रदुषण के कारण ये मौसम
प्रदुषण के कारण ये मौसम
मौसम आते जाते हैं, राह नई दिखाते हैं,
हिम्मत देते और आगे बढ़ना सिखाते हैं।
बड़ा सुंदर लगता है, मौसम का बदलना
मौसम बताते हैं, हमें गिरकर संभालना।
हर मौसम का, विशेष स्वभाव होता है,
कुछ हमारी सुनते, कुछ अपनी सुनाते हैं।
बड़ी विचित्र होती है, मौसम की कहानी,
किसी पर मेहरबानी, किसी से बेईमानी।
कभी जलाती गर्मी, कभी ठिठुराती सर्दी,
बहुत इंतजार करवाती हमें, शाम सुहानी।
पृथ्वी की वार्षिक गति से, ये सब होते,
मौसम चेतावनी देते, नींद से जगाते हैं।
मौसम पर निर्भर है, जग की जिंदगानी,
कभी धरती सूखी, कभी बहता है पानी।
विज्ञान पूर्वानुमान लगा लेता मौसम का,
इससे कम हो जाती है, सबकी परेशानी।
हर मौसम अपनी पहचान छोड़ जाता है,
सारे मौसम परचम अपने लहरा जाते हैं।
कोई मौसम तन मन में आग लगाता है,
कोई मौसम तन मन की आग बुझाता है।
प्रकृति के दोहन से हर मौसम नाराज है,
संकट में इंसान सब देखता रह जाता है।
प्रदुषण के कारण, हर मौसम बेईमान है,
सारे मौसम अपनी छाप छोड़के जाते हैं।
