STORYMIRROR

किशोर टपाल

Drama

2  

किशोर टपाल

Drama

परछाई

परछाई

1 min
310

तेरी यादों के जख्मों ने

ऐसा तराशा मुझे कि,


अब लोग मुझ मैं

तेरी परछाई ढूंढते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from किशोर टपाल

Similar hindi poem from Drama