किशोर टपाल
Drama
तेरी यादों के जख्मों ने
ऐसा तराशा मुझे कि,
अब लोग मुझ मैं
तेरी परछाई ढूंढते हैं।
महफ़िल यारों
परछाई
मैखाना
हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई ! हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई !
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं। डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं।
इसी से ही जीवन में उन्नति खुशहाली है आनी क्योंकि धरती और मैं विश्व की महतारी हूँ इसी से ही जीवन में उन्नति खुशहाली है आनी क्योंकि धरती और मैं विश्व की महतारी ...
फासलों को मिटाने के लिए फैसलों पर बात ना करते, अगर वो लोग मेरी जगह होते.. फासलों को मिटाने के लिए फैसलों पर बात ना करते, अगर वो लोग मेरी जगह होते..
रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में
विशेष बन गये हो या शेष भी नहीं रहे हो रोब है किसी पर या विरोधी बना लिये हो विशेष बन गये हो या शेष भी नहीं रहे हो रोब है किसी पर या विरोधी बना लिये हो
अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात
इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है। इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है।
किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस ! किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस !
खुद्दारी के दामन में उनका ही दम घुटता है। जो चापलूसी से सांसो का रिश्ता रखता है। खुद्दारी के दामन में उनका ही दम घुटता है। जो चापलूसी से सांसो का रिश्ता रखता ...
धन, अनाज धातु उगाने का हुनर मुझे याद अब भी है। धन, अनाज धातु उगाने का हुनर मुझे याद अब भी है।
शाम की चाय साथ पीने वाला काश कोई साथी होता, उम्र के इस पड़ाव में काश कोई हमदम होता। शाम की चाय साथ पीने वाला काश कोई साथी होता, उम्र के इस पड़ाव में काश कोई हमद...
बिन मेरे भले ना दिन ढले, मैं लौट के अब ना आऊँगा। बिन मेरे भले ना दिन ढले, मैं लौट के अब ना आऊँगा।
जिसे दिल से चाहोगे उसे खो मत देना, क्योंकि, फिर नाराज तुम मुझसे नहीं खुद से हो जाओगे जिसे दिल से चाहोगे उसे खो मत देना, क्योंकि, फिर नाराज तुम मुझसे नहीं खुद से ह...
उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है। उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है...
यह तथ्य जान लो झूठ, मुखौटों से, पहचान नहीं बनती, मानव की सुन्दर, अच्छी छवि, सच्चाई बिन यह तथ्य जान लो झूठ, मुखौटों से, पहचान नहीं बनती, मानव की सुन्दर, अच्छी छवि, स...
ये कविता समाज में महिला व् पुरुष के बीच जो भेदभाव होता है, उसपर लिखी हुई है। उम्मीद करती हु आपको पसद... ये कविता समाज में महिला व् पुरुष के बीच जो भेदभाव होता है, उसपर लिखी हुई है। उम्...
क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता ! क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता !
मुझे माफ करना जो तुमको रुलाया कभी भूले से तेरा दिल जो दुखाया मुझे माफ करना जो तुमको रुलाया कभी भूले से तेरा दिल जो दुखाया