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Govardhan Bisen 'Gokul'

Inspirational

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Govardhan Bisen 'Gokul'

Inspirational

पोवारी रामायण

पोवारी रामायण

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मोरो भगवानको मोठो नाम ।

जगमा कसेत उनला श्रीराम ॥

चलो चलो जाबीन, दर्शन उनका लेबीन, 

भेटे आमला मोक्षधाम ॥धृ॥

 

रावन मारन साठी, ओन जनम लेईस ।

कौशल्या माताला, बहुत खुशी देईस ॥

गयव जनक घर, करिस स्वयंबर, 

आणिस सिता धनुष तोळशान ॥१॥

 

धरीस कैकई न, दुय बर की आस ।

भरतला राज अना, रामला बनवास ॥

भयी बनकी तैयारी, श्रीराम आज्ञाकारी, 

संगमा चल्या सिता लक्ष्मण ॥२॥

 

पंचवटी मा बांधीन उनन, रव्हन साठी कुटी ।

लक्ष्मण न देखीस वहा, एक दिवस सुंदर नटी ॥

काटीस नाक कान, सुरपनखा जान, 

भयव रावन को अपमान ॥३॥

 

रावन आयव वहा, कपटी भिकारी बन ।

चोरीस सिताला, मांगशान भिक्षादान ॥

धाव धाव लक्ष्मण, बचाव मोरी जान, 

असो कईस मारीच मामान ॥४॥

 

सिताहरण लक बहुत, दु:खी भयव राम ।

बंदर भालु सुग्रिव, आया ओको काम ॥

पहाडी आनकर, पुल समुद्रपर, 

बांधीन गोटापर लिख श्रीराम ॥५॥

 

लगाईस हनुमान न, लंकामा सिताको शोध ।

पेटाईन पुस्टीला तब, आयव ओला क्रोध ॥

लंका ओन जारीस, कई राक्षस मारीस, 

मनमा सुमर सिताराम ॥६॥

 

करशान युध्द राम न, रावन ला मारीस ।

विभिषन को लंकामा, राज्यभिषेक करीस ॥

सोळाईस सिता, भरत को वु भ्राता, 

कथा सांगसे गोवर्धन ॥७॥


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