"पितृ दिवस"
"पितृ दिवस"
एक पुत्र का वो है,सारा आसमान
जिसके बगैर अधूरा है,पूरा जहान
पिता है,धरती का जीवित भगवान
जो पूरे करता,पुत्र के सब अरमान
गर पितृ साया सर पर है,श्रीमान
फिर तो साखी मुट्ठी में है,जहान
उन्हें पूछो,जिनके न यह आसमान
कैसे गुजरते बिना पिता दिनमान
पिता है तो,शूल भी देते है,मुस्कान
बगैर पिता फूल भी होते है,बेजान
पिता है,जिम्मेदारी न लगती,पहाड़
पिता शांत कर देते जिंदगी,तूफान
पिता देते रहते है,दुनियादारी ज्ञान
पिता को जो माने,नारायण भगवान
वो बनता है,यहां पर श्रवण सा महान
पिताजी का एकदिन क्या करूँ,गुणगान
हरदिन ही पिता रटती है,मेरी तो जुबान
उन्ही के नाम से आई है,मेरी पहचान
पिता है,तब तक कर लो ऐश श्रीमान
उनके बाद बस,निहारते रहो आसमान।
