पिता
पिता
बच्चों की भूख मिटाने को
जो खुद भूखा सो जाता है
वह एक पिता ही होता है।
भुला देता है, गम सारे अपने
सच करने, औलाद के सपने
वह एक पिता ही होता है।
देख दुःख ,संतान का अपनी
छुप- छुप कर जो रोता है
वह एक पिता ही होता है।
जो लड़ता दुःख से बार-बार
पर कभी न माने अपनी हार
वह कोई और नहीं, सिर्फ
एक पिता ही होता है।
गुस्सा कर जो आंख दिखाये
सही ग़लत का भेद बताये
वह कोई और नहीं बस
एक पिता ही होता है
वन गमन पर पुत्र राम के
जो प्राणों को अपने तज देता है
वह राजा, दशरथ सरीखा
एक पिता ही होता है।
बच्चे चैन से सो सकें, उसके
ऐसा सोच…...
जो खुद रातों को जगता है
वह कोई और नहीं
सिर्फ एक पिता ही होता है।।
