पिता का संघर्ष
पिता का संघर्ष
बचपन में उंगली पकड़े
वो हमें चलना सिखाता है,
गिरने पर हमें वो संभलना सिखाता है
हमे बुलंदियों तक पहुंचाने में
वो अपना सब कुछ लुटाता है
खुद कष्ट सह कर भी वो उफ़ नहीं करता
वो एक पिता होता है।
हिम्मत का बांध जब हमारा
टूट कर बिखरने लगे,
नाकामियां हमारी,
हमें हर ओर जब घेरने लगे,
परिस्थितियां हाथ से धीरे धीरे जब फिसलने लगे,
और मायूस घबरा के हम मैदान छोड़ने लगे,
तब एक पिता ही है,
जो हमे इन कठिनाइयों से उबारता है,
जीवन की सीख दे जाता है।
सारा जीवन वो अपना
बच्चों पे न्योछावर करता है
कभी बादल
कभी बरगद बन
दुख हमारे हर लेता है,
जीवन की राह दुश्वारियों में वो अक्सर
ऊपर आसमां,
नीचे जमीं पर भगवान बनके आता है ।
वो एक पिता
कभी शिक्षक,
कभी दोस्त,
कभी हम साया बन जाता है
कड़वी जीवन की दवा दे जाता है,
डांटता है
फटकारता है,
हमें हमारी गलतियों पर...!
चोट लगे हमें तो
मरहम भी बन जाता है।
कठिनाइयों में ही बीत गया
पिता का ये जीवन,
कष्ट सह सह कर
वो बन गए-कुंदन
संघर्ष उनका हमारे लिए प्रेरणा श्रोत होगा,
उनके पद चिन्हों पर चले सदा,
ये प्रयास सदैव हमारा होगा।
वो देते हैं..!
जीने कि एक सीख सदा,
"संघर्ष,संकल्प,अनुशासन
इसे जीवन में अपना लेना,
एक सफल जीवन का
मूल मंत्र इन्हे बना लेना"।
