पिता का प्यारा
पिता का प्यारा
प्यार का पूरा सागर भर कर ले आते हैं वो
फिर चाहे वो कुछ न कह पाते हो
बिन बोले ही सब कुछ समझ जाते
दुःख के हर समय में हमने
सब से पहले खड़ा पाया
नन्ही नन्ही सी उंगली पकड़कर
चलना उन्होंने सिखाया
जीवन के हर पहलु को
अपने अनुभव से हमको समझाया
हमारी हर उलझन को उन्होंने
अपना दुःख समझ सुलझाया
चाहे वो कितने भी दूर हो हमेशा
अपना प्यार उन्होंने हम पर बरसाया
एक छोटी सी आहट से
मेरा साया पहचाना,
मेरी हर सिसकियों में
अपनी आँखों को भिगोया
आशिर्वाद उनका हमेशा हम
पर बना रहे मांगे बस भगवान
से उनके लिए खुशी
हर ख़ुशी को मेरी पहले उन्होंने जाना
असमंजस के पलों में,
अपना विश्वास दिलाया
उनके इस विश्वास को
अपना आत्म विश्वास बनाया
ऐसे पिता के प्यार से
बड़ा कोई प्यार न पाया।
