STORYMIRROR

Babu Dhakar

Inspirational

4  

Babu Dhakar

Inspirational

पीले पत्ते और दिल गिले

पीले पत्ते और दिल गिले

1 min
120

अगर मगर से दिल जलते है

हमसे पुछों हमारे दिन कैसे कटते हैं

बह गये जो पीले पत्ते पानी में 

उनसे पुछों वो हवा में कैसे शान से उड़ते हैं।


किसकी क्या खता है किसको कितना पता है

ठहरा हुआ पानी तो मच्छरों का ठिकाना है

अकेले में रहना कहां तक अच्छा है

मुस्कुरा के मित्रों से मिलने में मजा है।


दिल का दरिया है बहता रुकने का काम नहीं

जाना है मंजिल तक पिछे मुड़ने का वक्त नहीं

जो पिछे रहे उन्होंने साथ तेरा छोड़ा था

उनकी ओर रूख करने का अब कोई सार नहीं।


ख्याल है खुली क़िताबें , पढ़ते-पढ़ते थक जाना

एक खत्म और दुसरे की बारी आ जाना

कमजोर पिलें पत्तों को,जो जैसे चाहे आजमा लेंगे

क्या कहें हरे पत्तों पर से भी देखों फूल चुन लेंगे।


पिले पत्ते, पैरों के तले अकेले में दिल ना लगे

हरे पत्तें, झोली में भरे मित्र मिलने से दिल खिलें।

पिले पत्तों का उड़ना हरे पत्तों को नहीं अखरता है

कितनी भी कोशिश करे हरे रहने की

एक रोज पीला तो हो ही जाना है।


पीला पीला पत्ता मन है गीला गीला

पीला पत्ता इधर उधर उड़ा कहीं नहीं ठहरा

गीला मन भी इधर उधर भटका कहीं ना मिला

भटकने में भूल ही गया कहां है ठिकाना अपना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational