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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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पीला

पीला

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रंगों में हैं कितने रंग

सबके सब हैं बड़े सुरंग

पीली सरसों खिली खेतों में

किसान का होता आनंदित मन

पीली चुनर गोरी की उड़ती

लहराती फिरती खुशियों के संग

पीली हल्दी,कुमकुम का तिलक ईश के 

मस्तक पर लगकर पूजा का होता शुभांरभ 

सूरज की स्वर्णिम किरणें

पड़ती जब धरती पर 

छा जाती चारों ओर उमंग

राम कृष्ण का पिताबंर पीला 

बढाता जाता भक्ति का रंग।


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